जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) प्रयागराज में आज एक दिवसीय मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, लखनऊ के दिशा-निर्देशों तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के अंतर्गत आयोजित हुआ। कार्यक्रम का मार्गदर्शन डायट प्राचार्य श्री राजेंद्र प्रताप ने किया, जबकि संयोजन में डायट प्रवक्ता सुश्री ऋचा राय (मनोविज्ञान), डॉ. राजेश पांडे, पंकज कुमार यादव और श्री विवेक त्रिपाठी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम के मुख्य विशेषज्ञ वक्ता मनोवैज्ञानिक डॉ. कमलेश कुमार (एमएनआईटी काउंसलर, प्रयागराज) ने प्रशिक्षुओं को मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और तनाव प्रबंधन के विषय में अत्यंत सरल, प्रेरक और वैज्ञानिक व्याख्यान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि मन की शांति ही जीवन की सफलता का केंद्र है। यदि व्यक्ति मानसिक रूप से स्थिर है, तो वह किसी भी परिस्थिति का सामना धैर्य और विवेक से कर सकता है। उन्होंने खिलाड़ियों द्वारा विषम परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखते हुए जीत प्राप्त करने का उदाहरण देते हुए समझाया कि धैर्य, अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण ही किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रमुख आधार हैं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट के कारणों—जैसे तकनीक का दुरुपयोग, तुलना, आत्म-संदेह और सामाजिक दबाव—को स्पष्ट करते हुए बताया कि समय रहते परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही उन्होंने प्रशिक्षुओं को आश्वस्त किया कि मानसिक द्वंद्व या तनाव की स्थिति में वे डायट के मनोविज्ञान प्रवक्ता ऋचा राय से निःसंकोच संपर्क कर सकते हैं।
कार्यशाला में डॉ. राजेश पांडेय, पंकज कुमार यादव, श्री विवेक त्रिपाठी तथा ऋचा राय (मनोविज्ञान प्रवक्ता) ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। डॉ. राजेश पांडेय ने मानसिक स्वास्थ्य को शिक्षा की गुणवत्ता और व्यक्तित्व विकास से जोड़ते हुए कहा कि भावनात्मक स्थिरता ही सीखने की वास्तविक नींव है। पंकज कुमार यादव ने जीवन की उत्पादकता, लक्ष्य-निर्धारण और संतुलित दिनचर्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मानसिक शांति ही निर्णय क्षमता को प्रभावी बनाती है। श्री विवेक त्रिपाठी ने तनाव प्रबंधन के सरल और व्यवहारिक उपाय बताते हुए कहा कि योग, ध्यान और सकारात्मक वातावरण मन को स्थिर रखने के महत्वपूर्ण साधन हैं।
इसी क्रम में ऋचा राय ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि मन की अशांति अक्सर अनजाने दबावों और अनियोजित जीवनशैली से उत्पन्न होती है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को यह संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल बीमारी का अभाव नहीं, बल्कि संतुलित, जागरूक और सकारात्मक मन की अवस्था है। उन्होंने यह भी कहा कि मन की समस्याओं को छिपाने के बजाय साझा करना और उचित मार्गदर्शन लेना ही सच्ची परिपक्वता है।
अंत में डायट प्राचार्य श्री राजेंद्र प्रताप ने उद्बोधन देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम प्रशिक्षुओं के लिए अत्यधिक आवश्यक सिद्ध होगा क्योंकि आज के युग में विद्यार्थियों के जीवन में मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा है। इस सत्र से उन्हें जीवन में धैर्य, संतुलन और सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कार्यक्रम के विशेषज्ञ डॉ. कमलेश कुमार के व्याख्यान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया तथा संयोजक प्रवक्ताओं के साथ विशेष रूप से मनोविज्ञान प्रवक्ता ऋचा राय के प्रशिक्षुओं के प्रति मार्गदर्शन और मानसिक सहयोग की सराहना की। इस कार्यक्रम में समस्त प्रवक्ता उपस्थित रहे। उक्त सूचना डायट प्रवक्ता वीरभद्र प्रताप ने दी।
डायट प्रयागराज में एक दिवसीय मानसिक स्वास्थ्य विषयक अनोखी कार्यशाला का सफल आयोजन