बिमला कुमारी गुप्ता वरिष्ठ लेखिका, हैदराबाद आजकल जब भी हम मोबाइल फोन उठाते हैं, तो सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगाते अनगिनत वीडियो और QR कोड दिखाई देते हैं। हाल ही में मेरे सामने भी एक ऐसा ही वीडियो आया, जिसमें लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक सहायता और दान की अपील की गई थी। आज के दौर में ऑनलाइन फ्रॉड और धोखाधड़ी इतनी बढ़ चुकी है कि किसी पर भी आँख मूँदकर भरोसा करना मुश्किल है। एक जागरूक नागरिक होने के नाते, मैंने तुरंत गूगल पर…
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सोशल मीडिया की ओर मुड़ता क्राइम का बाज़ार: संभलकर करें इस्तेमाल
सुनीता कुमारी पूर्णियां बिहार आज का युग डिजिटल क्रांति का युग है। इंटरनेट और स्मार्टफोन ने पूरी दुनिया को हमारी हथेली में समेट दिया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, एक्स (पूर्व में ट्विटर), यूट्यूब और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने संवाद को आसान, तेज़ और व्यापक बना दिया है। जहाँ इन माध्यमों ने शिक्षा, व्यापार, मनोरंजन और सामाजिक जागरूकता को नई दिशा दी है, वहीं दूसरी ओर अपराधियों के लिए भी यह एक नया और आसान बाज़ार बनता जा रहा है। आज अपराध केवल सड़कों या अंधेरी गलियों तक सीमित…
Read Moreबूथ कैप्चरिंग से एसआईआर तक : लोकतंत्र की शुद्धिकरण यात्रा
डॉ. राघवेन्द्र शर्मा एक समय था जब लोकसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों में दिल दहला देने वाली सियासी खबरें समाचार पत्रों के प्रथम पृष्ठ पर सुर्खियां बनी रहती थीं। उदाहरण – फलां राज्य में बूथ कैप्चरिंग हो गई। लोकतंत्र के लुटेरों द्वारा मतदान कार्य में लगे कर्मचारियों, अधिकारियों, पोलिंग बूथ एजेंटों और यहां तक की मतदाताओं की सामूहिक हत्याओं के समाचार प्रमुखता लिए रहते थे। कुछ ही मिनटों में फर्जी मत पत्रों से भरी हुई पेटियों को मतदान केंद्रों में रखकर, असली मत पेटियों और मतपत्रों को…
Read Moreअनवरत राष्ट्रसेवा का कीर्तिमान गढ़ते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
सुरेश पचौरी यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 7 अक्टूबर 2026 को अपनी अनवरत राष्ट्र सेवा का कीर्तिमान गढ़ने जा रहे हैं। यह वह ऐतिहासिक दिन होगा, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री और तत्पश्चात देश के प्रधानमंत्री के रूप में 7 अक्टूबर 2026 को अपनी राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण करेंगे। यह भारत के राजनीतिक परिदृश्य में नया रिकॉर्ड होगा। उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में तथा 26 मई 2014 को देश के प्रधानमंत्री के रूप में दायित्व संभाला था। मोदी के दौर में गुजरात…
Read Moreपुस्तक समीक्षा सजग करती है “ज्योतिष : जीवन पथ का विज्ञान”
डॉ. विवेकानंद उपाध्याय वरिष्ठ स्तम्भकार (देवरिया) भारतीय ज्ञान-परंपरा में ज्योतिष केवल भविष्य जानने की जिज्ञासा का विषय नहीं रहा है। यह काल, प्रकृति, कर्म, मानव-जीवन और ब्रह्मांडीय व्यवस्था के पारस्परिक संबंधों को समझने वाली एक विस्तृत ज्ञान-परंपरा है। ज्योतिषाचार्य अरुण कुमार मिश्र की प्रस्तुत पुस्तक “ज्योतिष : जीवन पथ का विज्ञान” इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में ज्योतिष को देखने का प्रयास करती है। लेखक ने इस ग्रन्थ में ज्योतिष को भय, भाग्यवाद और अंधविश्वास से अलग करते हुए जीवन को समझने, समय को पहचानने और कर्म के प्रति सजग होने की…
Read Moreहनुमान अंश : हिंदुस्तान की जड़ों से संवाद करता सिनेमा
संजय एम तराणेकर) भारत को समझने के लिए केवल उसके शहरों, बाजारों और आधुनिकता को देखना पर्याप्त नहीं है। भारत को समझना हो तो उसकी जड़ों तक पहुँचना होगा-उसकी आस्था, लोक-स्मृति, संस्कृति और उन कथाओं तक, जिन्होंने सदियों से उसके सामूहिक मन को आकार दिया है। इसी संदर्भ में ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्म का महत्व केवल उसके बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह जाता। यह फिल्म इसलिए भी उल्लेखनीय है कि उसने दर्शकों को केवल मनोरंजन नहीं दिया, बल्कि उन्हें उनकी अपनी सांस्कृतिक स्मृति से जोड़ने का…
Read Moreनिज भाषा का चाँद: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र*
डॉ. विवेकानंद उपाध्याय* *स्तंभकार* हर साल 9 सितंबर आते ही हिंदी साहित्य अपने पितामह के दरवाजे पर सिर झुकाता है। काशी की एक तंग गली, एक हवेली और उस हवेली में जन्मा एक बालक — जिसने कुल 34 साल और 4 महीने के जीवन में वह कर दिखाया, जिसे करने में सदियों लग जाती हैं। वह बालक था हरिश्चंद्र, जिसे दुनिया ने बाद में ‘भारतेन्दु’ कहा, यानी भारत का चंद्रमा। 1850 का भारत, गुलामी का अंधेरा, अंग्रेजी हुकूमत की धाक, और ऐसे में एक किशोर का यह संकल्प…
Read Moreआज भी जीवंत है सदियों पुरानी बिहुला-विषहरी की लोकगाथा
शिवशंकर सिंह पारिजात भारत की वाचिक परंपराओं का अपना विशिष्ट महत्व है। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक लोक-कंठ के माध्यम से पहुंचने वाली लोकगाथा, लोककथा, लोकोक्ति, मिथक और कहावतें केवल मनोरंजन का साधन नहीं होतीं। इनमें समाज की स्मृतियां, आस्थाएं, संघर्ष और जीवन के अनुभव सुरक्षित रहते हैं। इन्हें अक्सर ऐतिहासिक दस्तावेज का दर्जा नहीं दिया जाता, लेकिन गहराई से देखने पर इनके भीतर इतिहास के अनेक संकेत मिलते हैं। अंगभूमि की ऐसी ही जीवंत लोकगाथा है बिहुला विषहरी। भागलपुर, मुंगेर, नवगछिया, सुलतानगंज, बांका और झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों…
Read Moreजेन अल्फा के सवालों में घिरी मध्यप्रदेश की सत्ता
पवन वर्मा मध्यप्रदेश सरकार बड़े-बड़े इन्वेस्टमेंट समिट और ग्लोबल दावों में व्यस्त है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राज्य के नौनिहाल बुनियादी जरूरतों के लिए सड़क पर हैं। मध्यप्रदेश में सत्ता के सामने अब एक ऐसी पीढ़ी सवाल लेकर खड़ी हो रही है, जिसने अभी वोट देना भी शुरू नहीं किया है। जेन अल्फा के बच्चे स्कूल की सड़क, बस का किराया और स्कूल की जगह जैसे मुद्दों पर सड़क पर उतर रहे हैं। 15 अगस्त को छतरपुर के चंदला में बच्चों ने मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला रोक…
Read Moreप्रतीकात्मक सम्मान नहीं, संवैधानिक अधिकार चाहिए
उमंग सिंघार ‘विश्व आदिवासी दिवस’ की सभी बहनों-भाइयों और युवाओं को जोहार! 9 अगस्त का दिन सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया में हमारे अस्तित्व, हमारी जीवंत संस्कृति और हमारे पुरखों के संघर्ष को याद करने का दिन है। मैं जब भी अपने जंगलों, पहाड़ों और अपनी माटी के बीच पहुँचता हूँ, तो मुझे एक अजीब सा सुकून मिलता है। यह वही माटी है जिसने हमें सह-अस्तित्व का पाठ पढ़ाया है। हम आदिवासी केवल प्रकृति के बीच रहते नहीं हैं, हम प्रकृति को जीते हैं। हमारी सोच,…
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