अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में रहीं बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलिना जेटली ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट शेयर किया है। पति पीटर हाग के साथ चल रही तलाक की कानूनी कार्यवाही के बीच, सेलिना ने अपने बच्चों के साथ बिताए पुराने पलों को याद करते हुए गहरे मानसिक सदमे (trauma) और उससे उबरने के दर्दनाक सफर को बयां किया है। सेलिना का यह दिल को छू लेने वाला नोट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे पढ़कर उनके फैंस भी काफी भावुक नजर…
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कॉकरोच जनता पार्टी: युवाओं का व्यंग्यात्मक लोकतांत्रिक विद्रोह
(विवेक रंजन श्रीवास्तव) जब व्यवस्था बहरी हो जाती है तब व्यंग्य ही समाज का लाउडस्पीकर बनता है। सुप्रसिद्ध लेखक जॉर्ज ऑरवेल ने एक बार कहा था कि हर व्यंग्य अपने आप में एक तरह का सच होता है। आज के दौर में जब समाज को मुफ्त की रेवड़ियों के बदले नेता व्यवस्था के आसन खरीद लेना चाहते हैं। जब जनता को सम्मान और रोजगार की दरकार है, लेकिन मुख्यधारा के राजनेता जनता को सिर्फ एक मतदाता संख्या समझने की भूल कर रहे लगते हैं, तब व्यंग्य ही राजनेताओं के सत्ता…
Read Moreभारत बन गया दुनिया का डॉक्टर
यह कहना बिल्कुल अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भारत आज ‘दुनिया के डॉक्टर’ के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है। अपनी उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं, किफ़ायती दवाओं और वैश्विक संकटों में अपनी अग्रणी भूमिका के कारण भारत ने मानवता की सेवा में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।वैसे भी प्राचीन काल से ही भारत ‘आयुर्वेद’ और ‘सुश्रुत’ की विरासत के माध्यम से चिकित्सा जगत का मार्गदर्शक रहा है। लेकिन आधुनिक युग में, भारत ने तकनीकी प्रगति और दुनिया के स्वास्थ्य मानचित्र पर अपनी एक अनिवार्य जगह बना ली है। बीते कुछ दशकों में वैश्विक परिदृश्य पर भारत की…
Read Moreविमान हादसों में नेताओं की असमय विदाई
डॉ. सत्यवान सौरभ भारत की राजनीतिक यात्रा बार-बार आकाशी हादसों की भेंट चढ़ती रही है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती विमान दुर्घटना ने एक बार फिर पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। पांच लोगों की मौत के साथ राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हुआ, जिसकी भरपाई केवल संवेदनाओं से संभव नहीं। यह पहला मामला नहीं है—संजय गांधी (1980), माधवराव सिंधिया (2001), वाई.एस. राजशेखर रेड्डी (2009) जैसे उदाहरण बताते हैं कि उच्च पदस्थ नेताओं की अकाल मृत्यु बार-बार एक ही प्रश्न खड़ा करती है: क्या विमान हादसे महज़…
Read Moreकन्यादान नहीं, सम्मान चाहिए
डॉ. प्रियंका सौरभ आज विश्व बालिका दिवस मनाया जा रहा है। देश और दुनिया में इस अवसर पर अनेक कार्यक्रम, संगोष्ठियाँ और प्रतीकात्मक आयोजन हो रहे हैं। मंचों से बालिकाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण की बातें कही जा रही हैं। लेकिन यह प्रश्न बार-बार सामने आता है कि क्या किसी एक दिवस का आयोजन वास्तव में उस गहरी सामाजिक समस्या का समाधान कर सकता है, जो पीढ़ियों से बालिकाओं के जीवन को प्रभावित करती आ रही है। सम्मान किसी कैलेंडर की तारीख से तय नहीं होता, बल्कि वह समाज…
Read Moreडॉ. प्रियंका सौरभ की बाल काव्य पुस्तकें:
डॉ. प्रियंका सौरभ हरियाणा शिक्षा विभाग में राजनीति विज्ञान की पीजीटी लेक्चरर हैं तथा राजनीति विज्ञान में पीएचडी धारक। उनकी बाल कविता पुस्तकें “बच्चों की दुनिया और परियों से संवाद” बच्चों के लिए अत्यंत रोचक और ज्ञानवर्धक हैं। ये काव्य संग्रह बाल मन की मासूमियत को परियों के जादुई संवादों से सजाते हैं, नैतिक शिक्षा प्रदान करते हुए कल्पना की उड़ान भराते हैं। लेखिका का संक्षिप्त परिचय डॉ. प्रियंका सौरभ हरियाणा के सरकारी स्कूलों में छात्रों को राजनीतिक सिद्धांत, लोकतंत्र और शासन व्यवस्था सिखाती हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें बाल…
Read More77वां गणतंत्र दिवस 2026:वंदे मातरम के 150 वर्ष,
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत एक बार फिर इतिहास के ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा है,जहां परंपरा और भविष्य एक-दूसरे से हाथ मिलाते दिखाई दे रहे हैं।26 जनवरी 2026 को भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है और इस बार यह समारोह केवल एक संवैधानिक उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना,सांस्कृतिक पुनर्जागरण और वैश्विक कूटनीति का भव्य प्रदर्शन बनने जा रहा है। कर्तव्य पथ पर होने वाला यह आयोजन भारत की उस यात्रा का प्रतीक है,जिसमें वह औपनिवेशिक विरासत से निकलकर आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी…
Read Moreगणतंत्र के 77 वर्ष: उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और भविष्य का संकल्प
– डॉ. सत्यवान सौरभ भारत का गणतंत्र आज 77 वर्ष का हो चुका है। 26 जनवरी 1950 को लागू हुए संविधान ने एक नई भारत की नींव रखी, जो स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों से प्रेरित थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से हमने अनेक क्षेत्रों में प्रगति की—साहित्य, खेल, कृषि, विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर आर्थिक-सैन्य क्षमता तक। विविध संस्कृति को मजबूत करते हुए राष्ट्र ने वैश्विक पटल पर अपनी पहचान बनाई। चंद्रयान मिशनों से अंतरिक्ष विज्ञान में अग्रणी बने, यूपीआई जैसी डिजिटल क्रांति ने भुगतान व्यवस्था बदल दी, जबकि ओलंपिक-एशियाड में पदकों…
Read Moreमाँ-बाप की नीयत, परवरिश और टूटते घर
– डॉ. प्रियंका सौरभ भारतीय समाज में माता-पिता को सर्वोच्च नैतिक स्थान प्राप्त है। उन्हें त्याग, तपस्या और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता है। बचपन से ही यह सिखाया जाता है कि माँ-बाप कभी गलत नहीं हो सकते। उनकी हर बात आदेश है, हर निर्णय अंतिम सत्य। लेकिन बदलते सामाजिक परिदृश्य में यह धारणा अब कई सवालों के घेरे में है। आज जब पारिवारिक विघटन, तलाक, अलगाव और घरेलू तनाव की घटनाएँ बढ़ रही हैं, तब यह जरूरी हो गया है कि हम ईमानदारी से यह स्वीकार करें—माँ-बाप भी…
Read Moreभारत का राष्ट्र-निर्माण विमर्श बनाम सामाजिक यथार्थ:
भारत में सांप्रदायिक हिंसा 2025:- गिरावट के आंकड़े,गहरी होती सामाजिक दरारें और लोकतंत्र के सामने नई चुनौती हिंसा का स्वरूप बदलना,अधिक विकेंद्रित, अनियोजित, व्यक्तिगत या भीड़-आधारित होना,समाज के भीतर गहरे अविश्वास और नफरत की निरंतर मौजूदगी को दर्शाता है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र गोंदिया – 14 जनवरी 2026 को दिल्ली में आयोजित पोंगल महोत्सव के मंच से भारतीय प्रधानमंत्री का यह कथन कि राष्ट्र निर्माण में किसानों का महत्वपूर्ण योगदान है,केवल एकसांस्कृतिक या औपचारिक वक्तव्य नहीं था, बल्कि यह भारत की आत्मा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना की ओर…
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