एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत एक बार फिर इतिहास के ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा है,जहां परंपरा और भविष्य एक-दूसरे से हाथ मिलाते दिखाई दे रहे हैं।26 जनवरी 2026 को भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है और इस बार यह समारोह केवल एक संवैधानिक उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना,सांस्कृतिक पुनर्जागरण और वैश्विक कूटनीति का भव्य प्रदर्शन बनने जा रहा है। कर्तव्य पथ पर होने वाला यह आयोजन भारत की उस यात्रा का प्रतीक है,जिसमें वह औपनिवेशिक विरासत से निकलकर आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी…
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गणतंत्र के 77 वर्ष: उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और भविष्य का संकल्प
– डॉ. सत्यवान सौरभ भारत का गणतंत्र आज 77 वर्ष का हो चुका है। 26 जनवरी 1950 को लागू हुए संविधान ने एक नई भारत की नींव रखी, जो स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों से प्रेरित थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से हमने अनेक क्षेत्रों में प्रगति की—साहित्य, खेल, कृषि, विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर आर्थिक-सैन्य क्षमता तक। विविध संस्कृति को मजबूत करते हुए राष्ट्र ने वैश्विक पटल पर अपनी पहचान बनाई। चंद्रयान मिशनों से अंतरिक्ष विज्ञान में अग्रणी बने, यूपीआई जैसी डिजिटल क्रांति ने भुगतान व्यवस्था बदल दी, जबकि ओलंपिक-एशियाड में पदकों…
Read Moreमाँ-बाप की नीयत, परवरिश और टूटते घर
– डॉ. प्रियंका सौरभ भारतीय समाज में माता-पिता को सर्वोच्च नैतिक स्थान प्राप्त है। उन्हें त्याग, तपस्या और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता है। बचपन से ही यह सिखाया जाता है कि माँ-बाप कभी गलत नहीं हो सकते। उनकी हर बात आदेश है, हर निर्णय अंतिम सत्य। लेकिन बदलते सामाजिक परिदृश्य में यह धारणा अब कई सवालों के घेरे में है। आज जब पारिवारिक विघटन, तलाक, अलगाव और घरेलू तनाव की घटनाएँ बढ़ रही हैं, तब यह जरूरी हो गया है कि हम ईमानदारी से यह स्वीकार करें—माँ-बाप भी…
Read Moreभारत का राष्ट्र-निर्माण विमर्श बनाम सामाजिक यथार्थ:
भारत में सांप्रदायिक हिंसा 2025:- गिरावट के आंकड़े,गहरी होती सामाजिक दरारें और लोकतंत्र के सामने नई चुनौती हिंसा का स्वरूप बदलना,अधिक विकेंद्रित, अनियोजित, व्यक्तिगत या भीड़-आधारित होना,समाज के भीतर गहरे अविश्वास और नफरत की निरंतर मौजूदगी को दर्शाता है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र गोंदिया – 14 जनवरी 2026 को दिल्ली में आयोजित पोंगल महोत्सव के मंच से भारतीय प्रधानमंत्री का यह कथन कि राष्ट्र निर्माण में किसानों का महत्वपूर्ण योगदान है,केवल एकसांस्कृतिक या औपचारिक वक्तव्य नहीं था, बल्कि यह भारत की आत्मा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना की ओर…
Read Moreयौन शोषण के अड्डे बनते स्कूल-कॉलेज
शिक्षा और सुरक्षा के बीच फँसी छात्राएँ: यौन शोषण के अड्डे बनते स्कूल-कॉलेज – डॉ. प्रियंका सौरभ शिक्षा को भारतीय समाज में ‘मंदिर’ कहा जाता रहा है—एक ऐसा पवित्र स्थान जहाँ ज्ञान, संस्कार और भविष्य का निर्माण होता है। लेकिन हाल के वर्षों में जिस तरह से शिक्षण संस्थानों से यौन उत्पीड़न, मानसिक शोषण, डर और असुरक्षा की खबरें सामने आ रही हैं, उसने इस धारणा को गहरी चोट पहुँचाई है। सवाल यह नहीं है कि घटनाएँ हो रही हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या हमारे स्कूल, कॉलेज…
Read Moreनार्को-टेरर-मिशन ड्रग फ्री इंडिया @2029:नशे के खिलाफ़ भारत की निर्णायक लड़ाई
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत ने पिछले एक दशक में आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर जिस प्रकार का निर्णायक बदलाव देखा है, वह न केवल राष्ट्रीय राजनीति बल्कि अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समुदाय के लिए भी अध्ययन का विषय बन गया है। नक्सलवाद, जिसे लंबे समय तक भारत की सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती माना गया, उसके विरुद्ध 31 मार्च 2026 तक समाप्ति का लक्ष्य तय कर जिस तरह ठोस, बहु-स्तरीय और निरंतर अभियान चलाया गया, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, संस्थागत समन्वय…
Read Moreमनरेगा और जी-राम-जी: कल्याणकारी राज्य की बदलती परिभाषा
कल्याणकारी राज्य की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिक के साथ संकट के समय कैसे खड़ा होता है। भारत जैसे देश में, जहाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था आज भी अस्थिर कृषि, मौसमी श्रम और असंगठित रोज़गार पर टिकी है, वहाँ रोज़गार की सुरक्षा केवल आर्थिक नीति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक नैतिकता का प्रश्न है। इसी संदर्भ में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम—मनरेगा—ने वर्ष 2005 में भारतीय कल्याणकारी राज्य की परिभाषा को नया अर्थ दिया था। अब, विकसित भारत @2047 की राष्ट्रीय परिकल्पना…
Read Moreदेश को बचाने के लिए अरावली को भी बचाना हे।
* लेखक : प्रतिक संघवी राजकोट गुजरात अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो दिल्ली से गुजरात तक लगभग 650 किलोमीटर तक फैली हुई है। यह न केवल भूगर्भीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरणीय, धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी अपरिहार्य है। हाल के वर्षों में, खनन, निर्माण और निजीकरण की योजनाओं के कारण इसकी सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के कुछ आदेशों ने अनपेक्षित रूप से विपरीत प्रभाव डाला है, जबकि अन्य आदेशों का पूर्ण पालन नहीं होने…
Read Moreनाम बदलकर मतदाता बनने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों में दिख रहा खौफ
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के चलते सैकड़ों अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के अपने देश लौटने की खबरों के बीच, राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने आज मुर्शिदाबाद का दौरा किया। इससे पहले उन्होंने उत्तर 24 परगना के हकीमपुर सीमा चौकी पर हालात का जमीनी जायजा लिया था। राज्यपाल ने स्थानीय लोगों से बातचीत की और बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक भी की। राज्यपाल ने कहा कि SIR एक “अहम और महत्वपूर्ण” प्रक्रिया है और इससे जुड़े मामलों पर विभिन्न व्याख्याएं सामने आ रही हैं,…
Read Moreदेश का दुश्मन हमारा दुश्मन…दहशतगर्दों से सीधे भिड़ गए ओवैसी, दे डाली चेतावनी
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में एक भाषण के दौरान दिल्ली के लाल किले के पास हुई आतंकी घटना की खुलकर निंदा की, जिसमें कम से कम 10 लोग मारे गए थे। उन्होंने कहा कि देश के दुश्मन हमारे दुश्मन हैं। उन्होंने मुसलमानों को गाली देने और उनसे वफादारी का प्रमाणपत्र मांगने वालों को भी संदेश देते हुए कहा कि हमने कभी अपने देश से नफरत नहीं की। उल्लेखनीय है कि लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार विस्फोट में शामिल मुख्य चार आरोपी, जिसमें 15 लोग मारे गए थे, अल फलाह विश्वविद्यालय के डॉक्टर थे, जिनमें…
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