19 किलो बारूद की बरामदगी ने खोली अवैध पटाखा भंडारण की परत, कई ठिकाने अब भी पुलिस की नजर से दूर

कौशांबी ब्यूरो। मनौरी की अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 11 लोगों की मौत के बाद जिले में पटाखों के अवैध निर्माण और भंडारण को लेकर पुलिस की कार्रवाई तेज हुई है। सराय अकिल पुलिस की लगातार दो दिन की कार्रवाई में दो अलग-अलग ठिकानों से भारी मात्रा में पटाखे और 19 किलोग्राम बारूद बरामद किया जाना बताता है कि खतरा केवल उन ठिकानों तक सीमित नहीं है, जहां पुलिस की नजर पहुंच चुकी है। कार्रवाई के बीच क्षेत्र में कई अन्य मकानों और गोदामों में भी पटाखों के भंडारण की चर्चाएं सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार कार्रवाई की भनक लगने के बाद कुछ लोगों द्वारा भंडारण के ठिकाने बदले जाने की भी चर्चा है। ऐसे में पुलिस की चुनौती अब केवल दो आरोपितों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे अवैध भंडारण तंत्र तक पहुंचने की है।पुलिस के मुताबिक, 4 सितंबर 2026 को मुखबिर की खास सूचना पर रसूलपुर टप्पा मोड़ के पास रहमान मार्केट में दबिश दी गई। यहां से मो. सलमान पुत्र मो. फारुख, निवासी बुद्धपुरी, थाना सराय अकिल, जनपद कौशाम्बी को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से 18 कार्टून पटाखे और आठ किलोग्राम बारूद बरामद हुआ।इसके अगले दिन 5 सितंबर 2026 को पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर ग्राम खरका मन्नत मैरिज हाल के पास स्थित एक मकान में दबिश दी। यहां से मो. तालिब पुत्र मो. केशर, निवासी बुद्धपुरी, थाना सराय अकिल, जनपद कौशाम्बी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उसके कब्जे से 26 प्लास्टिक की बोरियों में अवैध पटाखे और 11 किलोग्राम बारूद बरामद किया। दो दिनों में हुई कार्रवाई में कुल 44 कार्टून-बोरियों में पटाखे और 19 किलोग्राम बारूद बरामद किया गया।

विस्फोटक अधिनियम की धाराओं में दर्ज हुए मुकदमे
पुलिस ने दोनों मामलों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं। मु0अ0सं0 283/2026 में धारा 288 बीएनएस, धारा 5/9बी(1)(बी) विस्फोटक अधिनियम तथा धारा 4/5 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। इसी प्रकार मु0अ0सं0 284/2026 में भी इन्हीं धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। दोनों आरोपितों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है।

विस्फोटक सामग्री के निर्माण, कब्जे, भंडारण, बिक्री और उपयोग से जुड़े मामलों में केवल बरामदगी ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि यह भी जांच का विषय होता है कि सामग्री कहां से आई, किस उद्देश्य से रखी गई थी और संबंधित स्थान पर उसके भंडारण की वैध अनुमति थी अथवा नहीं। ऐसे में पुलिस की मौजूदा कार्रवाई के साथ इन बिंदुओं पर भी जांच जरूरी है।

कई गोदामों तक अब तक नहीं पहुंची पुलिस की नजर
सराय अकिल क्षेत्र में दो अलग-अलग स्थानों से पटाखे और बारूद मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या क्षेत्र में अवैध पटाखों का भंडारण केवल इन दो स्थानों तक सीमित था? स्थानीय स्तर पर कई अन्य ठिकानों और गोदामों में पटाखे रखे होने की चर्चाएं हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ भंडारण स्थल पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए बदले भी गए हैं। हालांकि इन सूचनाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालिया हादसे के बाद ऐसी सूचनाओं का सत्यापन जरूरी हो जाता है।पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि क्षेत्र में पटाखों का कारोबार किन लोगों के माध्यम से संचालित हो रहा है, सामग्री कहां से पहुंच रही है और किन स्थानों पर उसका भंडारण किया जा रहा है। यदि किसी स्थान पर बड़ी मात्रा में पटाखे अथवा बारूद रखा है तो वहां लाइसेंस, स्वीकृत भंडारण क्षमता और सुरक्षा मानकों का सत्यापन किया जाना जरूरी है।

मनौरी हादसे के बाद भी अगर गोदाम अनदेखे रहे तो सवाल गंभीर
मनौरी की घटना ने अवैध पटाखा कारोबार के खतरे को किसी चेतावनी की तरह सामने ला दिया है। एक अवैध फैक्ट्री में हुए विस्फोट ने 11 जिंदगियां छीन लीं और कई परिवारों को हमेशा के लिए बदल दिया। इसके बाद भी यदि आबादी के बीच या असुरक्षित स्थानों पर भारी मात्रा में पटाखे और बारूद छिपाकर रखे जाने की सूचनाएं सामने आती हैं, तो उन्हें केवल अफवाह मानकर छोड़ना जनसुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं होगा।सराय अकिल में हुई कार्रवाई के बाद अब सभी संभावित पटाखा गोदामों, भंडारण स्थलों और निर्माण से जुड़े ठिकानों का व्यापक सत्यापन जरूरी है। पुलिस और संबंधित विभाग को यह देखना होगा कि कौन-कौन से लोग पटाखों के कारोबार से जुड़े हैं, किसके पास वैध लाइसेंस है, लाइसेंस में कितनी मात्रा की अनुमति है और मौके पर वास्तविक भंडारण कितना है।

गिरफ्तारी से आगे बढ़कर नेटवर्क तक पहुंचने की जरूरत
दो दिनों में दो ठिकानों से 19 किलो बारूद की बरामदगी निश्चित रूप से महत्वपूर्ण पुलिस कार्रवाई है, लेकिन यह कार्रवाई अपने आप में कई सवाल भी छोड़ती है। बरामद पटाखों और बारूद की आपूर्ति कहां से हुई? क्या इसके पीछे कोई बड़ा कारोबारी नेटवर्क है? क्या अन्य स्थानों पर भी इसका भंडारण किया जा रहा था? क्या कार्रवाई की भनक लगने के बाद ठिकाने बदले गए हैं? इन सवालों के जवाब जांच से ही सामने आएंगे। मनौरी की घटना के बाद अब कार्रवाई का पैमाना केवल “दबिश, बरामदगी और गिरफ्तारी” तक नहीं रहना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि संदिग्ध गोदामों और भंडारण स्थलों की पहचान कर उनका सत्यापन हो और अवैध पाए जाने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। क्योंकि 19 किलो बारूद की बरामदगी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—पुलिस की नजर जिन दो ठिकानों तक पहुंच गई, उनके अलावा वे कितने ठिकाने हैं जो अभी भी नजरों से दूर हैं।

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