कानपुर। शारद नवरात्रि पर श्री दुर्गा मंदिर सेवा समिति, गोविंद नगर द्वारा आयोजित नौ दिवसीय महोत्सव के पांचवें दिन मंदिर परिसर भक्तिमय रहा। सुबह 8:30 बजे और शाम 6 बजे महाआरती के बाद शाम 7 बजे माता की चौकी का आयोजन हुआ। नवरंग युवा जागरण पार्टी ने मधुर भजनों की प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भक्ति पदों के दौरान पूरा परिसर जय माता दी के जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर संरक्षक अजय कपूर ने माता को चुनरी चढ़ाकर मत्था टेका। चेयरमैन विजय कपूर द्वारा सूखे मेवे…
Read MoreCategory: अध्यात्म
महादेव की कृपा के लिए क्यों जरूरी है Rudrabhishek? जानें इसके Benefits और नियम
श्रावण माह का पवित्र महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू हुआ है। यह महीना भगवान शिव को अतिप्रिय है। ऐसे में इस दौरान उनकी आराधना करने के साथ ही रुद्राभिषेक का खास महत्व बताया गया है। इस महीने रुद्राभिषेक सिर्फ इसलिए खास नहीं कि इसमें शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाता है। बल्कि वैदिक परंपरा में ‘रुद्र’ के वैदिक मंत्रों के साथ महादेव का अभिषेक करना रुद्राभिषेक कहलाता है। सावन के महीने में शिवोपासना के लिए बेहद खास माना जाता है। देवशयनी एकादशी से शुरू होने वाले चातुर्मास के दौरान…
Read Moreजया पार्वती व्रत का समापन, जानिए Puja Vidhi और Udyapan का सही समय और नियम
सावन माह की शुरूआत को चुकी है। वहीं आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी से जया-विजया पार्वती व्रत शुरू हुआ था। जोकि सावन कृष्ण तृतीया यानी की 5 दिनों तक रखा जाता है। जया पार्वती व्रत भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित है। यह व्रत महिलाएं अखंड सुहाग और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं और कुंवारी कन्याएं मनचाए वर की प्राप्ति के लिए रखती हैं। इस बार आज यानी की 01 अगस्त को जया पार्वती व्रत का समापन किया जाएगा। कैसे करें समापन जया पार्वती व्रत 5 दिनों तक…
Read MoreSawan 2026 Special: नागपंचमी और महाशिवरात्रि पर खुलने वाले ये Unique Temples
श्रावण मास भगवान शिव को अति प्रिय है। कल यानी 30 जुलाई 2026 से सावन का महीना शुरु होने जा रहा है। इस महीने का इंतजार शिवभक्त लंबे समय से करते हैं। देशभर के शिवालयों में भक्तों की लंबी-लंबी लाइनें देखने को मिलती है। कुछ भक्तजन जलाभिषेक करने जाते हैं, तो कई लोग अपनी मनोकामना को लेकर भगवान भोलेनाथ के दरबार में पहुंच सकती हैं। क्या आप भी सावन में भगवान शिव के अनोखे मंदिरों के दर्शन करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। हिंदूधर्म भगवान शिव…
Read Moreध्यान, गुरु-भक्ति एवं ब्रह्म दीक्षा का संदेश बना माघ मेला का मूल उद्देश्य – पूज्य गुरुदेव स्वामी कृष्णानंद जी महाराज
प्रयागराज, माघ मेला। माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, साधना और जीवन-परिवर्तन का महापर्व है। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए सद्विप्र समाज सेवा शिविर में पूज्य सद्गुरु स्वामी कृष्णानंद जी महाराज के सानिध्य में ध्यान, गुरु-भक्ति और ब्रह्म दीक्षा के महत्व पर आधारित आध्यात्मिक अनुष्ठानों एवं प्रवचनों का आयोजन किया गया। पूज्य गुरुदेव ने अपने ओजस्वी एवं गूढ़ आध्यात्मिक संदेश में कहा कि मनुष्य इस संसार में एक किरदार निभाने आता है, परंतु वही किरदार सत्य मान लेने से जीवन माया में उलझ जाता है। उन्होंने…
Read MoreSaraswati Puja पर पाएं अखंड सौभाग्य, राशि अनुसार करें इन खास चीजों का दान, बरसेगी कृपा
बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। इस बार 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है। यह दिन न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है बल्कि जीवन में नई शुरुआत, सकारात्मक ऊर्जा और बौद्धिक विकास का भी प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन किए गए कुछ शुभ कार्य और उपाय विशेष रुप से फलदायी माने जाते हैं। अगर आप भी नौकरी में प्रमोशन, करियर में तरक्की, प्रतियोगी परीक्षाओं में…
Read MoreSaraswati Puja पर पाएं अखंड सौभाग्य, राशि अनुसार करें इन खास चीजों का दान, बरसेगी कृपा
बसंत पंचमी हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है, जो माघ महीने में मनाया जाता है। यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इस दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है जो विद्या, बुद्धि और कला की देवी मानी जाती हैं। इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और पीले फूल व मिठाइयां अर्पित करते हैं। इस बार यह पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा। विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में विशेष पूजा होती है। किसान इस दिन नई फसल की खुशी मनाते हैं। बसंत पंचमी से प्रकृति में…
Read MoreRatha Saptami 2026: 24 या 25 जनवरी? जानें सूर्य पूजा की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि
हिंदू धर्म व्रत-तिथियों का बेहद महत्व माना जाता है। माघ महीने में पड़ने वाली इस सप्तमी तिथि का महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में सूर्य देवता की पहली किरण इसी तिथि को पृथ्वी तिथि पर आई थी। रथ सप्तमी को माघी सप्तमी, महती सप्तमी, सप्त सप्तमी, पुत्र सप्तमी आदि के नाम से भी जाना जाता है। सूर्यदेव का अवतरण भी इस दिन हुआ था। रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की पूजा और व्रत करने से पापों का नाश होता है। इसके साथ ही,…
Read Moreऋतु परिवर्तन का लोकउत्सव: लोहड़ी और नई ऋतु की दस्तक
भारत की लोकपरंपराएँ केवल पर्व-त्योहार नहीं होतीं, वे समाज की सामूहिक स्मृति, प्रकृति-बोध और जीवन-दर्शन की जीवित अभिव्यक्तियाँ होती हैं। ये परंपराएँ समय के साथ बदलती जरूर हैं, लेकिन अपने मूल में वे मनुष्य और प्रकृति के रिश्ते को सहेज कर रखती हैं। उत्तर भारत में मनाया जाने वाला लोहड़ी ऐसा ही एक लोकपर्व है, जो सर्दियों की विदाई और वसंत के स्वागत का प्रतीक बनकर सामने आता है। यह पर्व केवल मौसम के बदलने की सूचना नहीं देता, बल्कि जीवन-दृष्टि के बदलते अध्याय की घोषणा करता है—जहाँ ठिठुरन के…
Read Moreकर संक्रांति: पतंगबाज़ी, आनंद, संस्कृति और चेतना
मकर संक्रांति का पर्व भारतीय संस्कृति में केवल एक तिथि नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन, सामाजिक सहभागिता और लोकजीवन की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह वह समय है जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर अग्रसर होता है और प्रकृति के साथ-साथ मानव जीवन में भी नई ऊर्जा का संचार होता है। इस पर्व से जुड़ी पतंगबाज़ी की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसने समय के साथ स्वयं को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और स्वास्थ्य संबंधी आयामों को भी अपने भीतर समाहित किया है। आज…
Read More