आज भी जीवंत है सदियों पुरानी बिहुला-विषहरी की लोकगाथा

शिवशंकर सिंह पारिजात भारत की वाचिक परंपराओं का अपना विशिष्ट महत्व है। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक लोक-कंठ के माध्यम से पहुंचने वाली लोकगाथा, लोककथा, लोकोक्ति, मिथक और कहावतें केवल मनोरंजन का साधन नहीं होतीं। इनमें समाज की स्मृतियां, आस्थाएं, संघर्ष और जीवन के अनुभव सुरक्षित रहते हैं। इन्हें अक्सर ऐतिहासिक दस्तावेज का दर्जा नहीं दिया जाता, लेकिन गहराई से देखने पर इनके भीतर इतिहास के अनेक संकेत मिलते हैं। अंगभूमि की ऐसी ही जीवंत लोकगाथा है बिहुला विषहरी। भागलपुर, मुंगेर, नवगछिया, सुलतानगंज, बांका और झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों…

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जेन अल्फा के सवालों में घिरी मध्यप्रदेश की सत्ता

पवन वर्मा मध्यप्रदेश सरकार बड़े-बड़े इन्वेस्टमेंट समिट और ग्लोबल दावों में व्यस्त है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राज्य के नौनिहाल बुनियादी जरूरतों के लिए सड़क पर हैं। मध्यप्रदेश में सत्ता के सामने अब एक ऐसी पीढ़ी सवाल लेकर खड़ी हो रही है, जिसने अभी वोट देना भी शुरू नहीं किया है। जेन अल्फा के बच्चे स्कूल की सड़क, बस का किराया और स्कूल की जगह जैसे मुद्दों पर सड़क पर उतर रहे हैं। 15 अगस्त को छतरपुर के चंदला में बच्चों ने मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला रोक…

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प्रतीकात्मक सम्मान नहीं, संवैधानिक अधिकार चाहिए

उमंग सिंघार ‘विश्व आदिवासी दिवस’ की सभी बहनों-भाइयों और युवाओं को जोहार! 9 अगस्त का दिन सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया में हमारे अस्तित्व, हमारी जीवंत संस्कृति और हमारे पुरखों के संघर्ष को याद करने का दिन है। मैं जब भी अपने जंगलों, पहाड़ों और अपनी माटी के बीच पहुँचता हूँ, तो मुझे एक अजीब सा सुकून मिलता है। यह वही माटी है जिसने हमें सह-अस्तित्व का पाठ पढ़ाया है। हम आदिवासी केवल प्रकृति के बीच रहते नहीं हैं, हम प्रकृति को जीते हैं। हमारी सोच,…

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बरखा बहार,सावन और कजरी एक दूसरे के पर्याय – अशोक बेशरम

गांव की चौपालों में कजरी गीतों का रागरंग सहेजें लोक कलाकार कभी तीन दशक पहले सावन और बरखा बहार में गांव-गांव की चौपालों और खेत सिवानों से उठने वाली कजरी की गूंज और बागों में पड़ने वाले झूलों का वह आलम अब धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। हमारी लोक संस्कृति और सामाजिक परंपरा के ताने-बाने से बुने कजरी गीतों की विविधता का वह लोकरंग आम आदमी के जीवन की आपाधापी में कहीं गुम सा हो रहा है। कजरी का वह लोक स्वरुप जहां एक ओर समुद्र रूपी जल कलश को…

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तलाक की लड़ाई के बीच Celina Jaitly का छलका दर्द,

अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में रहीं  बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलिना जेटली ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट शेयर किया है। पति पीटर हाग के साथ चल रही तलाक की कानूनी कार्यवाही के बीच, सेलिना ने अपने बच्चों के साथ बिताए पुराने पलों को याद करते हुए गहरे मानसिक सदमे (trauma) और उससे उबरने के दर्दनाक सफर को बयां किया है। सेलिना का यह दिल को छू लेने वाला नोट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे पढ़कर उनके फैंस भी काफी भावुक नजर…

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कॉकरोच जनता पार्टी: युवाओं का व्यंग्यात्मक लोकतांत्रिक विद्रोह

(विवेक रंजन श्रीवास्तव) जब व्यवस्था बहरी हो जाती है तब व्यंग्य ही समाज का लाउडस्पीकर बनता है। सुप्रसिद्ध लेखक जॉर्ज ऑरवेल ने एक बार कहा था कि हर व्यंग्य अपने आप में एक तरह का सच होता है। आज के दौर में जब समाज को मुफ्त की रेवड़ियों के बदले नेता व्यवस्था के आसन खरीद लेना चाहते हैं। जब जनता को सम्मान और रोजगार की दरकार है, लेकिन मुख्यधारा के राजनेता जनता को सिर्फ एक मतदाता संख्या समझने की भूल कर रहे लगते हैं, तब व्यंग्य ही राजनेताओं के सत्ता…

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भारत बन गया दुनिया का डॉक्टर

 यह कहना बिल्कुल अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भारत आज ‘दुनिया के डॉक्टर’ के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है। अपनी उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं, किफ़ायती दवाओं और वैश्विक संकटों में अपनी अग्रणी भूमिका के कारण भारत ने मानवता की सेवा में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।वैसे भी प्राचीन काल से ही भारत ‘आयुर्वेद’ और ‘सुश्रुत’ की विरासत के माध्यम से चिकित्सा जगत का मार्गदर्शक रहा है। लेकिन आधुनिक युग में, भारत ने तकनीकी प्रगति और दुनिया के स्वास्थ्य मानचित्र पर अपनी एक अनिवार्य जगह बना ली है। बीते कुछ दशकों में वैश्विक परिदृश्य पर भारत की…

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विमान हादसों में नेताओं की असमय विदाई

 डॉ. सत्यवान सौरभ भारत की राजनीतिक यात्रा बार-बार आकाशी हादसों की भेंट चढ़ती रही है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती विमान दुर्घटना ने एक बार फिर पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। पांच लोगों की मौत के साथ राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हुआ, जिसकी भरपाई केवल संवेदनाओं से संभव नहीं। यह पहला मामला नहीं है—संजय गांधी (1980), माधवराव सिंधिया (2001), वाई.एस. राजशेखर रेड्डी (2009) जैसे उदाहरण बताते हैं कि उच्च पदस्थ नेताओं की अकाल मृत्यु बार-बार एक ही प्रश्न खड़ा करती है: क्या विमान हादसे महज़…

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कन्यादान नहीं, सम्मान चाहिए

 डॉ. प्रियंका सौरभ आज विश्व बालिका दिवस मनाया जा रहा है। देश और दुनिया में इस अवसर पर अनेक कार्यक्रम, संगोष्ठियाँ और प्रतीकात्मक आयोजन हो रहे हैं। मंचों से बालिकाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण की बातें कही जा रही हैं। लेकिन यह प्रश्न बार-बार सामने आता है कि क्या किसी एक दिवस का आयोजन वास्तव में उस गहरी सामाजिक समस्या का समाधान कर सकता है, जो पीढ़ियों से बालिकाओं के जीवन को प्रभावित करती आ रही है। सम्मान किसी कैलेंडर की तारीख से तय नहीं होता, बल्कि वह समाज…

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डॉ. प्रियंका सौरभ की बाल काव्य पुस्तकें:

डॉ. प्रियंका सौरभ हरियाणा शिक्षा विभाग में राजनीति विज्ञान की पीजीटी लेक्चरर हैं तथा राजनीति विज्ञान में पीएचडी धारक। उनकी बाल कविता पुस्तकें “बच्चों की दुनिया और परियों से संवाद” बच्चों के लिए अत्यंत रोचक और ज्ञानवर्धक हैं। ये काव्य संग्रह बाल मन की मासूमियत को परियों के जादुई संवादों से सजाते हैं, नैतिक शिक्षा प्रदान करते हुए कल्पना की उड़ान भराते हैं। लेखिका का संक्षिप्त परिचय डॉ. प्रियंका सौरभ हरियाणा के सरकारी स्कूलों में छात्रों को राजनीतिक सिद्धांत, लोकतंत्र और शासन व्यवस्था सिखाती हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें बाल…

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