ध्यान, गुरु-भक्ति एवं ब्रह्म दीक्षा का संदेश बना माघ मेला का मूल उद्देश्य – पूज्य गुरुदेव स्वामी कृष्णानंद जी महाराज

प्रयागराज, माघ मेला।
माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, साधना और जीवन-परिवर्तन का महापर्व है। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए सद्विप्र समाज सेवा शिविर में पूज्य सद्गुरु स्वामी कृष्णानंद जी महाराज के सानिध्य में ध्यान, गुरु-भक्ति और ब्रह्म दीक्षा के महत्व पर आधारित आध्यात्मिक अनुष्ठानों एवं प्रवचनों का आयोजन किया गया।
पूज्य गुरुदेव ने अपने ओजस्वी एवं गूढ़ आध्यात्मिक संदेश में कहा कि मनुष्य इस संसार में एक किरदार निभाने आता है, परंतु वही किरदार सत्य मान लेने से जीवन माया में उलझ जाता है। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति ध्यान के माध्यम से अपने भीतर नहीं उतरता, तब तक वह बाह्य आडंबरों में ही भटकता रहता हैगुरुदेव ने स्पष्ट किया कि माघ मेला में आने का वास्तविक उद्देश्य केवल स्नान या दर्शन नहीं, बल्कि अपनी अंतरात्मा का दर्शन करना है। मेले की भीड़ के बीच यदि मन शांत नहीं हुआ, तो साधना अधूरी रह जाती है।अपने प्रवचन में उन्होंने गुरु-भक्ति की महत्ता बताते हुए कहा कि देवता गुरु नहीं हो सकते, पर गुरु शिष्य को देवत्व की ओर ले जाता है। गुरु का कार्य बाह्य पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि शिष्य को ध्यान द्वारा पूर्णता की ओर अग्रसर करना है। दीक्षा में दिया गया मनका केवल हाथ से फेरने के लिए नहीं, बल्कि मन को साधने का माध्यम है।पूज्य गुरुदेव ने कहा कि आज मनुष्य माया की कामना में उलझ गया है, इसलिए भावना कमजोर हो रही है। भावना को प्रबल करने का एकमात्र मार्ग ध्यान है। उन्होंने गुरुनानक देव जी के वचन “चलते-फिरते ध्यान करो” को उद्धृत करते हुए कहा कि ध्यान जीवन की निरंतर प्रक्रिया होनी चाहिए।बसंत पंचमी के पावन अवसर पर उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को संकल्प दिलाया कि वे कम से कम प्रतिदिन आधा घंटा ध्यान अवश्य करें। प्रातः स्नान के पश्चात स्वश्वास पर ध्यान केंद्रित करने को उन्होंने सबसे सरल और प्रभावी साधना बताया।इस अवसर पर ब्रह्म दीक्षा का महत्व बताते हुए गुरुदेव ने कहा कि ब्रह्म दीक्षा व्यक्ति को बाह्य पहचान से ऊपर उठाकर आत्मबोध की ओर ले जाती है। गुरु कृपा से प्राप्त यह दीक्षा जीवन की दिशा और दशा दोनों को बदल देती है।प्रवचन के दौरान शंकराचार्य के वचन
“ध्यानमूलं गुरुर्मूर्ति,
पूजामूलं गुरुर्पदम्,
मंत्रमूलं गुरुर्वाक्यं,
मोक्षमूलं गुरुकृपा”
का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ध्यान, पूजा, मंत्र और मोक्ष—चारों का मूल गुरु ही है।कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं, साधु-संतों एवं साधकों ने ध्यान साधना, गुरु भक्ति और ब्रह्म दीक्षा को माघ मेला के वास्तविक उद्देश्य के रूप में स्वीकार करते हुए इसे जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
माघ मेला के माध्यम से आत्म-जागरण, ध्यान और गुरु कृपा द्वारा मानव जीवन को सार्थक बनाना ही इस शिविर का मूल उद्देश्य है।

Related posts

Leave a Comment