सक्षम एवं समर्थ मॉड्यूल आधारित द्वितीय चक्र का तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

प्रधानाध्यापकों को विद्यालय नेतृत्व, शैक्षिक दायित्व, समावेशी शिक्षा एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रभावी प्रबंधन का दिया गया प्रशिक्षण

प्रयागराज। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), प्रयागराज में ‘सक्षम एवं समर्थ’ मॉड्यूल पर आधारित द्वितीय चक्र के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रशिक्षण में जसरा, प्रतापपुर एवं मेजा विकासखंडों परिषदीय प्रधानाध्यापकों ने प्रतिभाग कर विद्यालय नेतृत्व एवं प्रबंधन से संबंधित विभिन्न आयामों पर गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रधानाध्यापकों को प्रधानाध्यापक के विद्यालयीय दायित्व, नेतृत्व क्षमता एवं व्यावसायिक विकास, बाल वाटिका से संबंधित कार्य, शैक्षिक दायित्व, समावेशी शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता तथा वेल-बीइंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक एवं गतिविधि आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रधानाध्यापकों को विद्यालय में प्रभावी नेतृत्व प्रदान करने, शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता में सुधार लाने तथा प्रत्येक बच्चे के लिए सुरक्षित, समावेशी एवं आनंददायी वातावरण विकसित करने के लिए सक्षम बनाना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया कि विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता में प्रधानाध्यापक की भूमिका केवल प्रशासनिक दायित्वों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे शैक्षिक नेतृत्वकर्ता, मार्गदर्शक, प्रेरक एवं टीम लीडर के रूप में विद्यालय की समग्र प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बाल वाटिका से प्राथमिक स्तर तक बच्चों के सहज संक्रमण, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के समावेशन तथा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को विद्यालयी व्यवस्था का अभिन्न अंग बनाने पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रवक्ता ओम प्रकाश मिश्रा एवं कैलाश चंद्र शुक्ला के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण की विभिन्न गतिविधियां संचालित की गईं। संदर्भदाता के रूप में पंकज कुमार यादव, कुलभूषण मौर्य, विपिन कुमार, वीरभद्र प्रताप, शशिकांत मिश्रा, विवेक त्रिपाठी, डॉ. अब्दुल मोही एवं डॉ. राजेश कुमार पांडेय ने विभिन्न सत्रों में विषयगत एवं गतिविधि आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया।
संदर्भदाताओं ने समूह चर्चा, गतिविधियों, केस स्टडी, प्रस्तुतीकरण एवं अनुभव साझा करने जैसी विधियों के माध्यम से प्रधानाध्यापकों को विषयों से जोड़ा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने अपने विद्यालयों में आने वाली चुनौतियों, उनके समाधान तथा नवाचारी प्रयासों को भी साझा किया।
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रतिभागी प्रधानाध्यापकों ने प्रशिक्षण को उपयोगी एवं व्यवहारिक बताते हुए कहा कि ‘सक्षम एवं समर्थ’ मॉड्यूल के माध्यम से विद्यालय नेतृत्व को नई दिशा देने के साथ-साथ विद्यालय में शैक्षिक गुणवत्ता, समावेशन, बाल-केंद्रित वातावरण एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण ने प्रधानाध्यापकों को अपने विद्यालयों में प्रभावी नेतृत्व, बेहतर शैक्षिक वातावरण और प्रत्येक बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए नई ऊर्जा एवं दृष्टिकोण प्रदान किया।

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