प्रयागराज। हिन्दी पखवाड़ा के अन्तर्गत दिनांक 28.09.2026 को भा.वा.अ.शि.प.- पारिस्थितिक पुनर्स्थापन केन्द्र, प्रयागराज एवं भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, इलाहाबाद के संयुक्त तत्वावधान में “जीवन और विज्ञान की हिन्दी” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विज्ञान तकनीकी एवं दैनिक जीवन में हिन्दी भाषा की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। संगोष्ठी का उद्घाटन कार्यक्रम में उपस्थित आमंत्रित वक्ताओं द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। केन्द्र प्रमुख डॉ. संजय सिंह ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए जनजीवन एवं विज्ञान में हिन्दी के समावेश पर चर्चा किया साथ ही हिन्दी भाषा को अधिक से अधिक बढ़ावा देने का आह्वान भी किया। भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के कार्यकारी निदेशक, डॉ. विनय रंजन ने हिन्दी को ज्ञान-विज्ञान की भाषा के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। आमंत्रित वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. श्लेष गौतम ने विभिन्न कविताओं की पंक्तियों के माध्यम से हिंदी वाचिक परम्परा और विज्ञान विषय पर विस्तृत चर्चा किया। आमंत्रित वक्ता के रूप में आनंद कक्कड़ ने हिंदी, विज्ञान एवं सिनेमा पर एक त्रिकोणीय संवाद प्रस्तुत करते हुए बताया कि विज्ञान और हिंदी के प्रसार में सिनेमा एक महत्वपूर्ण माध्यम है। समाचोलक डॉ. अमितेश कुमार ने हिंदी कॉमिक्स और विज्ञान विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षा का काम है मनुष्य की चेतना में उन्नति और यह काम विज्ञान अच्छी तरह से करता है। ऐसे में विज्ञान की उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार में हिंदी कॉमिक्स ने महत्वपूर्ण कार्य किया है।
रंगकर्मी प्रवीण शेखर ने प्रकृति का रंगमंच विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रकृति को खो देना स्मृति का एक हिस्सा खो देना है। मनुष्य के जीवित अनुभव को रंगमंच पर उपस्थित करके इस स्मृति को बचाता है। पर्यावरण की समस्या सभ्यता के बारे में भी सवाल है। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं है यह अनेक भूगोलों, बोलियों, भाषाओं, लोक स्मृतियों और जीवन अनुभव से बनी हुई भाषा है। डॉ. अश्विनी कुमार ने मानवता के विकास की नई दिशाओं में जीवन विज्ञान की निर्णायक खोजो पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि कहा कि विज्ञान भी प्रकृति से ही प्रभावित होता है। डॉ. पूजा गौड़ ने हिंदी भाषा की प्रगति एवं वर्तमान स्थिति पर विस्तृत प्रकाश डाला। कार्यक्रम का सफल संचालन केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुभा श्रीवास्तव द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक आलोक यादव द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। आयोजित संगोष्ठी के समापन समारोह में दोनो संस्थानों के अधिकारी एवं कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन