आस्था और सम्मान का अद्भुत दृश्य, महापौर गणेश केसरवानी ने प्रयागराज पधारे श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा से किया अभिनंदन

प्रयागराज।
वसंत पंचमी के पावन अवसर पर तीर्थराज प्रयागराज श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर नजर आया। मां सरस्वती की आराधना एवं त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान हेतु प्रातःकाल से ही विभिन्न प्रांतों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं तीर्थयात्री प्रयागराज पहुंचे। संगम क्षेत्र में वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
इस शुभ अवसर पर प्रयागराज के महापौर श्री गणेश केसरवानी ने संगम तट पर पहुंचकर श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। श्रद्धालुओं पर की गई पुष्पवर्षा ने आस्था और सम्मान का अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया। इस दौरान संगम तट “हर-हर गंगे” और “जय मां सरस्वती” के जयघोष से गूंज उठा, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
महापौर श्री गणेश केसरवानी ने कहा कि वसंत पंचमी भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जो ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज को यह सौभाग्य प्राप्त है कि यहां मां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्नान कर श्रद्धालु पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता एवं सुचारु आवागमन के लिए नगर निगम एवं जिला प्रशासन द्वारा व्यापक एवं सुदृढ़ व्यवस्थाएं की गई हैं।
पर्व के अवसर पर संगम क्षेत्र सहित प्रमुख घाटों पर सफाई व्यवस्था, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, प्रकाश व्यवस्था एवं यातायात नियंत्रण के विशेष प्रबंध किए गए। स्वयंसेवी संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों द्वारा जल सेवा, प्राथमिक चिकित्सा एवं श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन की सेवाएं भी प्रदान की गईं, जिसकी श्रद्धालुओं ने सराहना की।
वसंत पंचमी के पावन पर्व पर प्रयागराज ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि यह नगरी केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सेवा और सामाजिक समरसता की जीवंत पहचान है।

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