Ram Mandir चंदा विवाद पर Akhilesh Yadav का बड़ा बयान: BJP का लंकाकांड Ayodhya में होगा

राम मंदिर ट्रस्ट में महासचिव पद से चंपत राय के इस्तीफ़े और राम मंदिर चंदे से जुड़े विवाद की जांच के बीच, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी पर तंज कसा। ‘X’ पर एक पोस्ट में यादव ने कहा कि दानभक्तों का नकाब आखिरकार उतर गया है क्योंकि भगवान की दैवीय शक्ति ने अपना चमत्कार दिखाया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी का ‘लंका कांड’ अयोध्या में ही होगा। आख़िर ‘दानभक्तों’ का मुखौटा उतर ही गया क्योंकि प्रभु की अलौकिक शक्ति ने अपना चमत्कार दिखा ही दिया। अब भाजपाइयों के  अहंकार की चमचमाती लंका के साम्राज्य का भी अंत होगा और ‘लंकाधिपति’ का भी।

सपा नेता ने कहा कि भाजपा के लिए तो अमृतकाल काल बनकर आया है। उन्होंने कहा कि ये सरकार तो कहती थी कि इसके राज में इस्तीफ़े नहीं होते हैं। ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’ से आहत जनता कटाक्ष करते हुए कह रही है कि भाजपाई कह रहे हैं कि हमने कहा था कि ‘इस्तीफ़ा’ नहीं होता, हमने इस्तीफ़ा नहीं ‘त्यागपत्र’ दिया है। दरअसल अभी तो ‘भाजपाई और उनके संगी-साथियों’ के काले कारनामों, करतूतों और कारगुज़ारियों का ये प्रथम अध्याय खुला है।

अखिलेश ने कहा कि बँटवारे की इस लड़ाई में अब इनकी ‘पार्टी, संघ, सभा, परिषद, वाहिनी और ट्रस्ट की टोली’ एक-दूसरे की पोल खोलेगी, इससे पहले कि ये लोग चोरी के माल से भरा अपना ‘झोला-बोरा’ लेकर इधर-उधर भागें, बार्डर बंद कर दिये जाएं। अभी तो शुरुआत है, अब तो केयर फ़ंड के साथ-साथ अनरजिस्टर्ड लोगों को अपने कुकृत्यों का हिसाब भी देना होगा। भगवान के ऑडिट से ‘भाजपाई-गिरोह’ बच नहीं पाएगा। NEET के छात्र कह रहे हैं कि जब इस्तीफ़े शुरू हो गए हैं तो ‘लीकाधिपति’ का भी करवा दीजिए।

इसके साथ ही उन्होंने एक और एक्स पोस्ट में लिखा कि हमने तो पहले ही कहा था कि CCTV का नाम ‘चढ़ावा-चोरी TV’ साबित होगा। जिन लोगों ने ‘सत्रह’ बार लूटा वो सैंकड़ों साल से इतिहास में बदनाम हैं, जिन्होंने केवल 40 दिन में ‘सत्तर’ बार लूटा वो तो इतिहास में इस महापाप के लिए ‘सात’ जन्मों के लिए काले अक्षरों में दर्ज़ हो जाएंगे। ये सोचा जाए जिन्होंने सात हफ़्ते में इतनी चोरी कर ली है, उन्होंने पिछले इतने सालों में कितना चुराया होगा, कितना आपस में बाँटा होगा, कितना चुपके से छुपाया-दबाया होगा और कितना अपने मुखिया तक पहुँचाया होगा। अखंड निंदनीय!

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