Sharad Pawar Congress Merger: 27 साल बाद कांग्रेस में ‘घर वापसी’

महाराष्ट्र की राजनीति से इस समय की सबसे बड़ी और धमाकेदार सियासी खबर सामने आ रही है। शरद पवार की पार्टी और कांग्रेस के बीच विलय को लेकर बेहद गंभीर चर्चा शुरू हो चुकी है। इस बात की आधिकारिक पुष्टि खुद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता विजय वडेट्टीवार ने की है। एनडीटीवी से खास बातचीत में विजय वडेट्टीवार ने इस संभावित विलय पर मुहर लगाते हुए कहा शरद पवार की पार्टी के कांग्रेस में विलय को लेकर हमारे केंद्रीय आलाकमान के साथ बातचीत चल रही है। जो लोग भी कांग्रेस और शरद पवार की धर्मनिरपेक्ष विचारधारा में विश्वास रखते हैं, उन सभी का हमारी पार्टी में हमेशा स्वागत है।

सियासी गलियारों में इस खबर के बाद से हलचल तेज हो गई है। गौरतलब है कि साल 1999 में शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर ‘राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी’ (NCP) का गठन किया था। लेकिन समय का चक्र ऐसा घूमा कि साल 2023 में उनके भतीजे अजीत पवार ने बगावत कर दी और एनसीपी को दो फाड़ कर दिया। अजीत पवार अपने समर्थक विधायकों के साथ महाराष्ट्र की बीजेपी-शिवसेना सरकार में शामिल हो गए थे। भतीजे की बगावत के बाद शरद पवार की पार्टी (NCP-SP) महाविकास अघाड़ी में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है, और अब दोनों दलों के पूरी तरह एक होने की सुगबुगाहट ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में नया उबाल ला दिया है।

हाल के झटकों से पार्टी चौकन्ना

ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे जैसे क्षेत्रीय नेताओं को हाल ही में राजनीतिक झटके लगे हैं। उनके सांसदों ने अपनी मूल पार्टियों को छोड़कर अलग गुट बनाने का फ़ैसला किया है और इसी माहौल में कांग्रेस के साथ संभावित विलय की चर्चा हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली में शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के कांग्रेस में विलय को लेकर वरिष्ठ नेतृत्व स्तर पर बातचीत अब अंतिम चरण में है और इसमें सकारात्मक प्रगति हुई है। सूत्रों का यह भी कहना है कि कांग्रेस लीडरशिप ने NCP (शरदचंद्र पवार) के उन विधायकों और सांसदों को हरी झंडी दे दी है जो कांग्रेस में शामिल होना चाहते हैं। सूत्रों के मुताबिक, 85 साल के शरद पवार और उनकी पार्टी के राजनीतिक भविष्य को लेकर दो अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी का एक धड़ा नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) में शामिल होने के पक्ष में है। उनका तर्क है कि पार्टी की संसदीय ताकत उसे NDA का हिस्सा बनने में मदद कर सकती है।

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