सुनीता कुमारी
पूर्णियां बिहार
आज का युग डिजिटल क्रांति का युग है। इंटरनेट और स्मार्टफोन ने पूरी दुनिया को हमारी हथेली में समेट दिया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, एक्स (पूर्व में ट्विटर), यूट्यूब और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने संवाद को आसान, तेज़ और व्यापक बना दिया है। जहाँ इन माध्यमों ने शिक्षा, व्यापार, मनोरंजन और सामाजिक जागरूकता को नई दिशा दी है, वहीं दूसरी ओर अपराधियों के लिए भी यह एक नया और आसान बाज़ार बनता जा रहा है। आज अपराध केवल सड़कों या अंधेरी गलियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे मोबाइल की स्क्रीन के पीछे छिपकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।
सोशल मीडिया का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी पहुँच है। कुछ ही सेकंड में कोई भी व्यक्ति लाखों लोगों तक पहुँच सकता है। यही विशेषता अपराधियों के लिए भी सबसे बड़ा हथियार बन गई है। वे नकली पहचान बनाकर लोगों का विश्वास जीतते हैं, उनकी निजी जानकारी चुराते हैं और फिर आर्थिक, मानसिक तथा सामाजिक रूप से उन्हें नुकसान पहुँचाते हैं।
सबसे अधिक बढ़ते अपराधों में ऑनलाइन फ्रॉड प्रमुख है। आज फेसबुक या इंस्टाग्राम पर किसी प्रसिद्ध कंपनी या बैंक के नाम से नकली पेज बनाकर लोगों को भारी छूट, इनाम या लॉटरी का लालच दिया जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति दिए गए लिंक पर क्लिक करता है, उसकी बैंक संबंधी जानकारी या ओटीपी चुरा लिया जाता है और कुछ ही मिनटों में उसके खाते से पैसे गायब हो जाते हैं।
एक उदाहरण उत्तर प्रदेश के एक शिक्षक का है, जिन्हें सोशल मीडिया पर एक आकर्षक विज्ञापन दिखाई दिया कि केवल ₹10 में महंगा मोबाइल फोन मिलेगा। उन्होंने लिंक पर क्लिक किया और अपनी बैंक जानकारी भर दी। कुछ ही देर में उनके खाते से लगभग ₹80,000 निकाल लिए गए। बाद में पता चला कि वह पूरा पेज नकली था।
सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को ब्लैकमेल करना भी एक बड़ा अपराध बन चुका है। अपराधी किसी व्यक्ति की तस्वीर डाउनलोड कर उसके नाम से नया अकाउंट बना लेते हैं। इसके बाद उसके रिश्तेदारों या मित्रों से पैसे माँगते हैं या अश्लील तस्वीरें भेजकर बदनाम करने की कोशिश करते हैं।
विशेष रूप से युवतियाँ और महिलाएँ इस प्रकार के अपराधों का अधिक शिकार होती हैं। कई बार उनकी तस्वीरों का दुरुपयोग कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। ऐसे मामलों में पीड़ित सामाजिक शर्म के कारण शिकायत भी नहीं कर पाते, जिससे अपराधियों का मनोबल और बढ़ जाता है।
साइबर बुलिंग भी सोशल मीडिया की एक गंभीर समस्या बन चुकी है। किसी व्यक्ति का लगातार मज़ाक उड़ाना, अपमानजनक टिप्पणी करना, धमकी देना या अफवाह फैलाना मानसिक अपराध की श्रेणी में आता है। किशोरों और विद्यार्थियों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। कई मामलों में अवसाद, आत्मविश्वास की कमी और आत्महत्या जैसे दुखद परिणाम भी सामने आए हैं।
सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ का प्रसार भी समाज के लिए गंभीर चुनौती है। झूठी खबरें, सांप्रदायिक अफवाहें और भ्रामक वीडियो कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुँच जाते हैं। कई बार ऐसी अफवाहों के कारण हिंसा, दंगे और सामाजिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसलिए किसी भी खबर को बिना सत्यापन के साझा करना भी एक प्रकार से अपराध को बढ़ावा देना है।
आज ऑनलाइन नौकरी, वर्क फ्रॉम होम, लोन, निवेश और क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर भी बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हो रही है। सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन देकर लोगों से रजिस्ट्रेशन फीस या निवेश के नाम पर पैसे ऐंठ लिए जाते हैं और बाद में अपराधी गायब हो जाते हैं।
एक अन्य उदाहरण बिहार के एक युवक का है, जिसे इंस्टाग्राम पर विदेश में नौकरी का प्रस्ताव मिला। उससे वीज़ा और प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर लगभग डेढ़ लाख रुपये जमा करा लिए गए। भुगतान के बाद न नौकरी मिली और न ही कंपनी का कोई पता चला।
बच्चे भी सोशल मीडिया अपराधियों के निशाने पर हैं। ऑनलाइन गेम, चैट और वीडियो के माध्यम से अपराधी बच्चों से दोस्ती करते हैं, उनकी निजी जानकारी लेते हैं और कभी-कभी उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। इसलिए माता-पिता को बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर उचित निगरानी रखनी चाहिए।
इन अपराधों से बचने के लिए सबसे पहले डिजिटल जागरूकता आवश्यक है। किसी भी अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। अपनी निजी जानकारी, बैंक विवरण, ओटीपी, पासवर्ड या आधार संबंधी जानकारी कभी साझा न करें। सोशल मीडिया अकाउंट में मजबूत पासवर्ड रखें और दो-स्तरीय सुरक्षा (Two-Factor Authentication) का उपयोग करें।
यदि कोई संदिग्ध लिंक, संदेश या कॉल प्राप्त हो तो तुरंत उसकी सत्यता की जाँच करें। किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी होने पर देर किए बिना साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या संबंधित साइबर पुलिस से संपर्क करें। समय पर शिकायत करने से आर्थिक नुकसान की भरपाई की संभावना बढ़ जाती है।
सोशल मीडिया स्वयं बुरा नहीं है। यह एक शक्तिशाली माध्यम है, जिसका उपयोग ज्ञान, शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय और सामाजिक विकास के लिए किया जा सकता है। समस्या तब उत्पन्न होती है जब इसका उपयोग बिना सावधानी और जागरूकता के किया जाता है। जिस प्रकार सड़क पर वाहन चलाते समय यातायात नियमों का पालन आवश्यक है, उसी प्रकार डिजिटल दुनिया में भी सुरक्षा के नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
अंततः यही कहा जा सकता है कि सोशल मीडिया आज अवसरों का संसार है, लेकिन इसके साथ अपराध का बाज़ार भी तेजी से फैल रहा है। अपराधी हमारी छोटी-सी लापरवाही का लाभ उठाकर हमें आर्थिक, सामाजिक और मानसिक नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसलिए हर क्लिक सोच-समझकर करें, हर लिंक पर भरोसा न करें और हर जानकारी साझा करने से पहले उसकी आवश्यकता पर विचार करें। याद रखें—सतर्कता ही साइबर सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल है। यदि हम जागरूक रहेंगे, तो सोशल मीडिया हमारे लिए वरदान सिद्ध होगा, अन्यथा यही सुविधा हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा भी बन सकती है।