अमर शहीद ऊधम सिंह जी का 87वां शहादत पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया

अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद एवं शहीद ए आजम भगत सिंह स्मारक समिति के तत्वाधान में आज प्रातः 9ः30 बजे से आजाद शहादत स्थल पार्क में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। सुबह से स्कूली बच्चों में गजब का उत्साह था।सजधज कर तख्तियों में स्लोगन देश भक्ति लिखे हुए हाथ में लेकर अपने विद्यालय से पैदल मार्च कर आजाद पार्क, पहुंच कर शहीद उधम सिंह अमर रहें, अमर शहीदों की क्रान्तिकारी परम्परा अमर रहे चन्द्रशेखर आजाद व शहीद-ए-आजम भगत सिंह अमर रहे के गगनभेदी नारे लगाये। संस्था के पदाधिकारियों ने मुख्य अतिथि को सम्मानपूर्वक अपने घेरे में लेकर शहादत स्थल तक पहुंचाया और सभी अतिथियों ने शहीद उधम सिंह जी के तैल चित्र व आजाद जी के कांस्य की प्रतिमा पर पुष्पांजलि व माल्यार्पण किया। तत्पश्चात उ०प्र० सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा 21 गनशाट फायर कर, सम्मान गारद द्वारा सलामी व पुलिस बैण्ड द्वारा राष्ट्र भक्ति ध्वनि बजाकर उ०प्र० सरकार की ओर से सम्मान प्रकट किया। साथ ही जनपद के बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा गायन, वादन, नृत्य व लघु नाटिका का मंचन कर अमर शहीदो ं के प्रति सम्मान प्रकट किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीयुत अनिल कुमार पी0ई0एस0 जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रयागराज ने कहा की अमर शहीद ऊधम सिंह बहुत लागी किस्म के क्रान्तिकारी थे और जलियावाला नरसंहार के तत्काल प्रत्यक्षदर्शी थे और उन्होने कर्तव्यपालन के साथ प्रतिशोध की प्रतिज्ञा मौत का बदला मौत से लेने का जनरल डायर को मारकर पूरा किया। बचपना उनका बहुत ही मुफलसी में बीता था। 13 अप्रैल 1919 खूनी बैशाखी के दिन जलियावाला बाग में ब्रिटिश फौज द्वारा किये गये नरसंहार के चश्ममदीद थे तथा भारी मन से अपने साथियों की सहायता से सभी लाशों का दाह संस्कार रिवाज अनुसार व्यवस्था की थी। मार्च, 1940 को भरी सभा में अपने बर्बरता की डींग हाक रहाृ था, खचाखच भरे हाल में गोली मारकर हत्या कर दी और भागे नहीं एक ओर अंग्रेज अफसर लार्ड वेलिंग्टन न्यायाधीश जो कि बचाव में आगे आया उसे भी वहीं गोली से मारकर मृत्युदण्ड दिया । इन्कलाब जिन्दाबाद का नारे लगाते हुए अपनी गिरफ्तारी दे दी। साढ़े तीन माह केस चला और 31 जुलाई, 1940 को इन्हें फांसी दे दी गयी जहां वह हंसते हुए शहीद हो गये। विशिष्ट अतिथि ने जगदीश प्रसाद उद्यान अधीक्षक ने कहा कि अमर शहीद उधम सिंह के माता पिता बाल्यकाल में ही दिवंगत हो चुके थे उनको कई वर्ष अनाथालय में रहना पड़ा उनमें देश प्रेम कूट-कूट कर भरा था। जलियावाला काण्ड से वो आग बबूला हो गये साथियों के दाह संस्कार के बाद ठान लिया जनरल डायर को मारना है तो मारा भले 21 साल लग गये। कार्यक्रम के अध्यक्षता राजू जायसवाल मरकरी ने किया तथा संचालन महासचिव राजबहादुर गुप्ता एवं धन्यवाद ज्ञापित अनिल कुमार अन्नू ने किया। प्रमुख रूप से सोमित बनर्जी वरिष्ठ समाजसेवी, कुॅवर धनंजय सिंह,, डाॅ0 राजेश मोहन गुप्ता, सरदार रनवीर सिंह (प्रपौत्र सहीद उद्यम सिंह), विशाल गुप्ता, ज्ञान चन्द्रवंशी रंगकर्मी, अतुल राय, अमन सिंह, प्रभाकान्त मिश्रा, महेश त्रिपाठी, पूनम गुप्ता, साहू आलोक गुप्ता, सुनील कुमार शुक्ला, भारत भूषण वाष्र्णेय, महेन्द्र सक्सेना, सुधा शर्मा, सरिता श्रीवास्तव, रोकैया अब्बासी, पायल शर्मा, अमान उल्ला, प्रतीक्षा तिवारी, आराध्या द्विवेदी, खुशी उपाध्याय, रेनू सिंह, डाॅ0अर्चना साहू आदि रहे।

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