गोरखपुर, 27 जून, 2026ः महाप्रबंधक, पूर्वोत्तर रेलवे श्री उदय बोरवणकर के मार्गदर्शन में रेलवे परिसरों को केवल कार्यस्थल तक सीमित न रखकर उन्हें सीखने, संवेदनशीलता, नवाचार और सामाजिक सहभागिता के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में यांत्रिक कारखाना, गोरखपुर में 27 जून, 2026 को रेल कर्मचारियों के बच्चों में हिंदी भाषा के प्रति रुचि, रचनात्मक लेखन, मंच अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास, संवाद-कौशल और साहित्यिक संवेदनशीलता को विकसित करने के उद्देश्य से “कौशल विकास एवं साहित्यिक कार्यशाला” का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर मुख्य कारखाना प्रबंधक डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि “मशीनें हमें गति देती हैं, तकनीक हमें सुविधा देती है, लेकिन भाषा और साहित्य हमें संवेदनशील मनुष्य बनाते हैं। बच्चों में रचनात्मक लेखन और अभिव्यक्ति का विकास उनके आत्मविश्वास, कल्पनाशक्ति और व्यक्तित्व निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि रेल कर्मचारियों के बच्चंे हमारे रेल परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे कार्यक्रम बच्चों को भाषा, साहित्य और मंच-अभिव्यक्ति के माध्यम से जीवनोपयोगी कौशल विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।
कार्यशाला में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रो. प्रत्युष दूबे ने बच्चों को हिंदी साहित्य, रचनात्मक लेखन, भाषा की सुंदरता और विचारों को शब्द देने की कला के बारे में बताया। उन्होंने बच्चों को बताया कि साहित्य केवल पढ़ने की वस्तु नहीं, बल्कि देखने, सोचने, महसूस करने और समाज को समझने का माध्यम है। मंच के कवि श्री विनीत पाण्डेय ने बच्चों को मंच प्रस्तुति, भाव-अभिव्यक्ति, कविता पाठ, आवाज के उतार-चढ़ाव, संवाद शैली और प्रभावी प्रस्तुतीकरण के व्यावहारिक पक्षों से परिचित कराया। उन्होंने बच्चों को सहज, आत्मविश्वासपूर्ण और भावपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर उपस्थित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये तथा कहा कि हिंदी साहित्य केवल पुस्तकों या पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन, लोक-संस्कृति, परिवार, समाज और भावनाओं की जीवंत अभिव्यक्ति है। कहानी बच्चों को कल्पना देती है, कविता उन्हें संवेदना देती है और मंच अभिव्यक्ति उन्हें आत्मविश्वास देती है। आज के डिजिटल युग में भी अच्छी भाषा, स्पष्ट विचार और प्रभावी अभिव्यक्ति बच्चों को भीड़ से अलग पहचान देती है।
इस अवसर पर यांत्रिक कारखाना द्वारा “डिजिटलीकरण और हिंदी साहित्य” विषय पर रेलकर्मियों के बच्चों हेतु निबंध प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने कविता पाठ, विचार अभिव्यक्ति और मंच संचालन में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसका संचालन बच्चों ने स्वयं किया, जिससे उन्हें मंच पर बोलने, अतिथियों का परिचय देने, कार्यक्रम को क्रमबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने और सार्वजनिक अभिव्यक्ति का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।