बड़े साहब का महाप्रयाण समाज के लिए अपूरणीय क्षति : रजनीकांत श्रीवास्तव
भारतीय जनसंघ एवं भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य, वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद, SIS ग्रुप के संस्थापक एवं चेयरमैन तथा संगत-पंगत संगठन भारत के संस्थापक अध्यक्ष परम श्रद्धेय डॉ. रविन्द्र किशोर सिन्हा जी (बड़े साहब) के निधन का समाचार अत्यंत हृदयविदारक एवं पीड़ादायक है। उनके महाप्रयाण से समाज ने एक ऐसे उदार हृदय अभिभावक, मार्गदर्शक एवं कर्मयोगी व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
बड़े साहब का व्यक्तित्व केवल राजनीतिक और व्यावसायिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं था, बल्कि वे जरूरतमंदों के लिए सहारा और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए एक मजबूत संबल थे। किसी की भी समस्या उनके संज्ञान में आती थी तो वे उसके समाधान के लिए स्वयं आगे आते थे। आर्थिक कठिनाई में फंसे व्यक्ति को आर्थिक सहयोग देना हो या निराश व्यक्ति को हौसला और आत्मविश्वास प्रदान करना, उन्होंने सदैव एक अभिभावक की भूमिका निभाई।
उनके सामाजिक योगदान को मैं व्यक्तिगत रूप से भी अनुभव करता रहा हूं। जब हिंदुस्तान समाचार एवं युग वार्ता आर्थिक कठिनाइयों के दौर से गुजर रहे थे, तब बड़े साहब ने आगे बढ़कर सहयोग और संरक्षण प्रदान किया तथा इन समाचार माध्यमों को पुनः सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सकारात्मक पत्रकारिता, सामाजिक सरोकारों और समाजहित के विषयों को सदैव प्रोत्साहित किया। समाज के लिए उपयोगी एवं प्रेरणादायी विचारों तथा स्वदेशी उत्पादों को जन-जन तक पहुंचाने के प्रयासों में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।
प्रयागराज के कायस्थ समाज के लिए भी उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। केपी ट्रस्ट की धर्मशाला के निर्माण एवं विकास में उनके महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोग ने एक ऐसी सामाजिक धरोहर को आकार देने में योगदान दिया, जो प्रयागराज आने वाले कायस्थ समाज सहित अन्य समाज के लोगों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी।
बड़े साहब की सबसे बड़ी विशेषता थी कि वे लोगों को केवल सलाह नहीं देते थे, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर उनके साथ खड़े भी होते थे। उनके भीतर समाज के प्रति संवेदना, संगठन के प्रति समर्पण और जरूरतमंदों के प्रति आत्मीयता का अद्भुत संगम था।
आज उनका सशरीर हमारे बीच न होना व्यक्तिगत रूप से भी एक अभिभावक और मार्गदर्शक को खोने जैसा है। उनके द्वारा किए गए सामाजिक, संगठनात्मक, पत्रकारिता एवं मानवीय कार्य सदैव स्मृतियों में जीवित रहेंगे और आने वाली पीढ़ियों को सेवा एवं समर्पण की प्रेरणा देते रहेंगे।
प्रभु श्रीराम जी से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार, संगत-पंगत संगठन भारत, उनके सहयोगियों एवं असंख्य शुभचिंतकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति और संबल प्रदान करें।
ऐसे महान समाजसेवी, उदार हृदय अभिभावक एवं प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व को शत-शत नमन। भावभीनी श्रद्धांजलि।
ॐ शांति! शांति!! शांति!!!
विनम्र श्रद्धांजलि सहित