समाज सुधारक आयंकाली ने ब्रिटिश भारत के त्रावणकोर राज्य में उन लोगों की प्रगति के लिए काम किया, जिन्हें अस्पृश्य माना जाता था। उनके प्रयासों ने उन परिवर्तनों को प्रभावित किया जो उन लोगों की सामाजिक कल्याण में सुधार करते हैं, जिन्हें आज अक्सर दलित समाज के रूप में जाना जाता है,उक्त उद्गार महामना आयांकाली के स्मृति दिवस पर रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत डुमरी स्थित सपा जन संपर्क कार्यालय पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में व्यक्त करते हुए सपा के पूर्व प्रवक्ता चंद्रभूषण सिंह यादव ने कहा कि अय्यांकाली,जो अशिक्षित थे,का मानना था कि शिक्षा सभी बच्चों के लिए उपलब्ध होनी चाहिए और इसका मतलब है कि सरकारी स्कूलों तक अस्पृश्यों को पहुंच की अनुमति देनी चाहिए।
सपा के पूर्व प्रवक्ता चंद्रभूषण सिंह यादव ने कहा कि महामना आयांकाली के प्रयासों से 1895 के बाद अस्पृश्य समुदायों के लिए कई सार्वजनिक स्कूल खोले गए थे लेकिन प्राथमिक शिक्षा का अधिकार दायरे में सीमित था।1904 में शिक्षा का राज्य वित्त पोषण प्रभावी हो गया लेकिन सरकार द्वारा स्कूलों को इन अस्पृश्य लोगों को 1907 में प्रवेश करने के आदेश दिए जाने के बाद भी स्थानीय अधिकारियों ने इसे मना करने के तरीके खोजे जिसे लेकर आयांकाली का संघर्ष जारी रहा।
महामना आयांकाली की ही तरह उत्तर भारत में सामाजिक न्याय की अवधारणा को मूर्त रूप देने हेतु मंडल आंदोलन केे महानायक राम अवधेश सिंह ने आजीवन संघर्ष किया, की जन्म जयंती पर उन्हें याद करते हुए सपा के पूर्व प्रवक्ता चंद्रभूषण सिंह यादव ने कहा कि राम अवधेश बाबू ने अपना सम्पूर्ण जीवन सामाजिक समता आंदोलन को समर्पित कर दिया।
महामना आयांकाली और रामअवधेश सिंह के स्मृतिदिवस एवं जन्म जयंती पर उन्हें याद करते हुए नमन करने वाले प्रमुख सपाइयों में व्यास यादव,गोविंद यादव, उपेंद्र यादव, सतेंद्र यादव, बेलभद्र गोंड, सुरेश नारायण सिंह,शंकर गोंड, नारायण प्रसाद, अयोध्या वर्मा, रामदास यादव, श्यामराज कन्नौजिया आदि के नाम प्रमुख हैं।
मंडल आंदोलन के प्रमुख नेता थे रामअवधेश सिंह – चंद्रभूषण सिंह यादव