पर्यावरण बचाने का लिया संकल्प, छात्राओं को दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश

भारत विकास परिषद की पर्यावरण संगोष्ठी में जल संरक्षण, वृक्षारोपण व प्लास्टिक मुक्त जीवन अपनाने का आह्वान, प्रतिभाओं को किया सम्मानित

प्रयागराज, 16 जुलाई भारत विकास परिषद, प्रयाग प्रांत की समृद्धि शाखा के तत्वावधान में गुरुवार को श्री नारायण आश्रम बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज, शिवकुटी में पर्यावरण जागरूकता संगोष्ठी एवं छात्रा कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत से हुआ। विद्यालय की प्रधानाचार्या एवं भारत विकास परिषद की सदस्य श्रीमती विभा मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के संस्कार विकसित करना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

कार्यक्रम का संचालन प्रांतीय पर्यावरण संयोजिका डॉ. श्रीमती मनोज मिश्रा ने किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार या किसी संस्था का नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि आज प्रकृति का संरक्षण किया जाएगा तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण प्राप्त होगा।

संगोष्ठी में जल संरक्षण, वृक्षारोपण, पर्यावरण प्रदूषण, प्लास्टिक के दुष्प्रभाव, भू-जल संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि चावल जैसी फसलों के उत्पादन में अत्यधिक जल की खपत होती है, इसलिए जल का विवेकपूर्ण उपयोग समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इथेनॉल उत्पादन सहित विभिन्न क्षेत्रों में पानी के उपयोग तथा पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के उपायों पर भी प्रकाश डाला गया।

वक्ताओं ने कहा कि भारत विकास परिषद संस्कार, सेवा, समर्पण एवं सहयोग की भावना के साथ समाज में जन-जागरूकता के विविध कार्यक्रम संचालित करती है। पर्यावरण संरक्षण, जल बचत, वृक्षारोपण तथा स्वच्छता जैसे अभियान परिषद की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले तथा जल का सदुपयोग करे, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पर्यावरण प्रदान किया जा सकता है।

नेत्र सर्जन डॉ. अंबरीश पाण्डेय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से बच्चों की आंखों की रोशनी प्रभावित हो रही है। उन्होंने छात्राओं से हरी सब्जियां, गाजर, पालक, पपीता जैसे पौष्टिक आहार लेने, नियमित व्यायाम करने तथा डिजिटल उपकरणों का सीमित उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने भारत विकास परिषद द्वारा संचालित पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण अभियानों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम हैं।

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण पर आधारित गीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। प्रांतीय महासचिव अमित श्याम ने पर्यावरण विषयक प्रश्नोत्तरी आयोजित की। “पृथ्वी के फेफड़े” किसे कहा जाता है, इस प्रश्न का सही उत्तर कक्षा-12 की छात्रा पंखुड़ी चंद्रा ने अमेज़न वर्षावन बताकर सभी की सराहना प्राप्त की।

AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) प्रश्नोत्तरी में सृष्टि पाल प्रथम रहीं, जबकि पोस्टर प्रतियोगिता में श्रेया मौर्य (कक्षा-9) प्रथम, अंशिका (कक्षा-7-ए) द्वितीय एवं सृष्टि मौर्य (कक्षा-7-ए) तृतीय स्थान पर रहीं। सभी विजेताओं को सम्मानित किया गया।

आभार व्यक्त करते हुए पर्यावरण संयोजक सुनील धवन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल भाषणों से नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतों से संभव है। उन्होंने प्रत्येक छात्रा के जन्मदिवस पर एक तुलसी का पौधा भेंट करने, प्लास्टिक की थैलियों का प्रयोग बंद कर कपड़े के थैले अपनाने तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के समापन से पूर्व डॉ. श्रीमती मनोज मिश्रा ने सभी छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक शपथ दिलाई तथा पूरे उत्साह के साथ “पर्यावरण को बचाना है, धरती को स्वर्ग बनाना है” का नारा लगवाया। छात्राओं ने भी पूरे जोश के साथ नारे को दोहराते हुए जल संरक्षण, वृक्षारोपण एवं स्वच्छ-हरित पर्यावरण के निर्माण का संकल्प लिया।

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