स्पेशल यू० पी० टेट परीक्षा मे हिन्दीभाषा के प्रश्नपत्र को मज़ाक़ बनाकर रख दिया गया है– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

प्रयागराज। अभी हाल मे करायी गयी ‘स्पेशल यू० पी० टेट परीक्षा’ मे हिन्दी-भाषा/सामान्य हिन्दी के प्रश्नपत्र को लेकर छात्र-छात्राओँ मे कहीँ संतोष है तो कहीँ असंतोष; वह भी स्वयं के बोध तक सीमित दिख रहा है; परन्तु जिस विषय की ओर छात्र-छात्राओँ का ध्यान आकृष्ट होना चाहिए उस ओर होता ही नहीँ, जबकि भाषा का मूल आधार उसका व्याकरण होता है।
यह वक्तव्य है, व्याकरणवेत्ता एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की, जिन्होँने पिछले दिनो आयोजित ‘स्पेशल यू० पी० टेट परीक्षा मे हिन्दी-भाषा के प्रश्नो को लेकर गहरी आपत्ति जतायी है। आचार्य ने बताया है कि जिन व्यक्तियोँ ने भाषा-विशेषज्ञ के रूप मे उक्त भाषाओँ के प्रश्नपत्र तैयार किये हैँ, उन्हेँ यह नहीँ मालूम कि प्रश्नो की प्रकृति कैसी होनी चाहिए। इसके लिए उन्होँने हिन्दी-भाषाखण्ड के प्रश्न 31 और 34 के सारे उत्तर-विकल्प को अशुद्ध ठहराते हुए, सारी मात्राओँ को ग़लत प्रयोग बताया है। प्रश्न 36, 40 और 48 के प्रश्नान्त मे निर्देशक-चिह्न (–) लगाया गया है, जबकि विवरण-चिह्न (:–) प्रयुक्त होगा। यही प्रयोग परीक्षार्थी करते तो उनका अंक काट लिया जाता। आचार्य ने आगे बताया कि प्रश्न 41 मे चार प्रकार की अशुद्धि है :– ‘निम्न’ और ‘विराम चिह्न’ के स्थान पर ‘निम्नलिखित’ और ‘विरामचिह्न’ होगा; ‘लगाइए’ के आगे उप-विरामचिह्न (:) के स्थान पर विवरणचिह्न लगेगा; नीचे के वाक्य मे युगल उद्धरण चिह्न (” “) के स्थान पर एकल उद्धरणचिह्न (‘ ‘) लगेगा तथा वाक्यान्त मे पूर्ण विरामचिह्न। प्रश्न 42 मे तीन प्रकार की लापरवाही की गयी है :– प्रश्न मे ‘कौन सा’ की जगह ‘कौन-सा’, उत्तर-विकल्प मे ‘भूतकाल’ की तरह से ‘वर्तमानकाल’ और ‘भविष्यत्काल’ शब्द एक मे रहेँगे। प्रश्न 48 का प्रश्न और उसके सारे उत्तर-विकल्प अशुद्ध हैँ; क्योँकि दिख रहे किसी वाक्यान्त मे पूर्ण विरामचिह्न लगाया ही नहीँ गया है और न ही इसमे दी गयी लोकोक्ति के अन्त मे भी। प्रश्न 49 मे तीन प्रकार की ग़लती है :– वाक्य के आरम्भ मे एकल उद्धरणचिह्न नहीँ दिख रहा जबकि अन्त मे लगा दिख रहा है। क्रिया ‘करवाया’ का स्त्रीलिंग-शब्द ‘करवायी’ होगा, नकि ‘करवाई’। ‘कौन सी’ की जगह ‘कौन-सी’ होगा। इसमे वाक्य का कर्त्ता-शब्द ‘शामु’ ही आपत्तिजनक है। जैसे ‘रामू’ मे दीर्घ ऊ की मात्रा है वैसे ही ‘शामू’ वा ‘सामू’ होगा। प्रश्न 51 मे, जिसे वाक्य बताया गया है, वह है ही नहीँ; क्योँकि अन्त मे पूर्ण विरामचिह्न नहीँ है। प्रश्न 53 के सारे उत्तर-विकल्प अशुद्ध हैँ; क्योँकि किसी वाक्यान्त मे पूर्ण विरामचिह्न लगाया ही नहीँ गया है। इसके
(D) विकल्प मे ‘वर्ण बोली जाती है’ की जगह ‘वर्ण बोला जाता है’ होगा; क्योँकि वर्ण पुंल्लिंग है। प्रश्न 55 मे दो प्रकार की अशुद्धि है :– दिये गये वाक्यान्त मे पूर्ण विरामचिह्न लगेगा; कर्मवाच्य रूप’ की जगह ‘कर्मवाच्य-रूप’ होगा। प्रश्न 57 मे शुद्ध विरामचिह्न-प्रयोग से सम्बन्धित प्रश्न किया गया है; परन्तु आश्चर्य का विषय है कि प्राश्निक (प्रश्नपत्र तैयार करनेवाला) को ही विरामचिह्न का बोध नहीँ है। वह अपने ही प्रश्नात्मक वाक्य मे विवरणचिह्न के स्थान पर निर्देशकचिह्न का, ‘निम्नलिखित’ के स्थान पर ‘निम्न’ का और ‘विरामचिह्न’ की जगह ‘विराम चिह्न’ का प्रयोग कर रहा है।
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बड़ी संख्या मे अशुद्धि-प्रदर्शन कर और उनका शुद्ध रूप प्रस्तुत कर, अपना क्षोभ व्यक्त करते हुए पूछा है– कौन-से लोग वा एजेंसी हैँ, जिन्हेँ भाषा-व्याकरण की बिलकुल समझ नहीँ है, फिर भी उन्हेँ लगातार हिन्दीभाषा/सामान्य हिन्दी के प्रश्नपत्र तैयार करने का काम दिया जाता रहा है? इसे सुस्पष्ट किया जाना चाहिए।

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